
भारत में वित्त वर्ष 2027 के दौरान खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया गया है। अप्रैल में यह दर मामूली बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो मार्च के 3.40 प्रतिशत से ऊपर थी। यह जानकारी बुधवार जारी क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में 74 दिनों से जारी तनाव खुदरा महंगाई पर धीरे-धीरे असर डाल रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को अभी तेज मूल्यवृद्धि से राहत मिल रही है। ऐसे में रिजर्व बैंक अपनी अगली मौद्रिक नीति में ब्याज दरें अपरिवर्तित रख सकता है।
आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों से ऊर्जा संकट गहराया है, जिसने ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों के पूर्वानुमान को 90-95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। यह पिछले वर्ष से करीब 32 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल में बेस इफेक्ट से बिजली, गैस व ईंधन महंगाई घटी, जबकि पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर रखने से परिवहन लागत नियंत्रित रही।
कोर मुद्रास्फीति चौथे माह 3.7 प्रतिशत पर टिकी रही, क्योंकि ऊर्जा व इनपुट लागतों का असर उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंचा। रेस्तरां, आवास सेवाएं, घरेलू सामान व उपकरणों की महंगाई बढ़ी, लेकिन कीमती धातुओं में सुस्ती ने संतुलन बनाया।
भविष्य में ईंधन दबाव बढ़ सकता है। उत्पादक ऊर्जा, व्यापार व परिवहन लागतें उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं, जिससे कोर महंगाई चढ़ेगी। अल नीनो, लू व कम मानसून से कृषि उत्पादन प्रभावित हो खाद्य महंगाई पर जोर पड़ सकता है।
