
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अप्रैल में भारत का सौदा बाजार चमका। कुल 220 लेन-देन से 22.8 अरब डॉलर की राशि जुटाई गई, जो देश की निवेश आकर्षण को रेखांकित करता है।
ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, पांच मेगा सौदों ने 17.4 अरब डॉलर का योगदान दिया, जो कुल मूल्य का 80 प्रतिशत है। एमएंडए ने बाजार को लीड किया—103 सौदों से 18.7 अरब डॉलर, मई 2022 के बाद सर्वाधिक। मासिक आधार पर मूल्य में 1000 प्रतिशत की उछाल और वॉल्यूम में 10 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई।
आउटबाउंड सौदों ने बाजी मारी—21 ट्रांजेक्शन से 17.7 अरब डॉलर। प्राइवेट इक्विटी में चयनात्मक तेजी: 109 सौदे 3.2 अरब डॉलर के, मूल्य साल के दूसरे उच्चतम पर।
सार्वजनिक बाजार सक्रिय: 6 आईपीओ से 450 मिलियन डॉलर, 2 क्यूआईपी से 548 मिलियन। शांति विजेता ने कहा, ‘बड़े आउटबाउंड सौदे रणनीतिक महत्वाकांक्षा दिखाते हैं, आईपीओ-क्यूआईपी मजबूत पूंजी तंत्र का प्रमाण।’
फार्मा वैल्यू में शीर्ष, इंफ्रा-मैन्युफैक्चरिंग में बड़े सौदे। रिटेल-कंज्यूमर व आईटी वॉल्यूम में आगे, रियल एस्टेट एमएंडए वॉल्यूम में ऊर्जा के साथ 16-16 सौदों से टॉप।
यह प्रदर्शन भारत को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाता है, आगे और गतिविधियों की उम्मीद।
