
नई दिल्ली में भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 27 जनवरी को हस्ताक्षर के लिए तैयार है। इसे ‘सभी डील्स की मां’ करार दिया गया है और वित्त वर्ष 2031 तक भारत का ईयू के साथ व्यापार अधिशेष 51 अरब डॉलर को पार करने का अनुमान है।
दुनियाभर की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह समझौता एक दशक पुरानी बातचीत का परिणाम है, जिसे वैश्विक व्यापारिक उथल-पुथल ने तेज कर दिया। एमके ग्लोबल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह एफटीए भारत की यूरोपीय बाजारों में स्थिति को मजबूत बनाएगा। भारत के कुल निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 के 17.3 प्रतिशत से बढ़कर 22-23 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
हालांकि भारत की ईयू निर्यात बाजार में मौजूदा हिस्सेदारी महज 0.8 प्रतिशत है, लेकिन हाल के वर्षों में व्यापार संतुलन उलट गया है। वित्त वर्ष 2019 में ईयू का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का सरप्लस था, जो 2025 में 15 अरब डॉलर के घाटे में बदल गया। यह समझौता चीन पर निर्भरता घटाने और सप्लाई चेन विविधीकरण में ईयू की रणनीति का हिस्सा बनेगा।
कपड़ा, जूते, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और रसायन उद्योगों को बड़ा बाजार मिलेगा। वित्त वर्ष 25 में द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर का रहा, जिसमें भारत ने 75.9 अरब डॉलर का निर्यात किया और 60.7 अरब डॉलर का आयात। स्मार्टफोन, वस्त्र, टायर, दवाएं, ऑटो पार्ट्स जैसी वस्तुएं ईयू के लिए महत्वपूर्ण हो रही हैं।
ईयू से उच्च तकनीकी मशीनरी, विमान, रसायन और मेडिकल उपकरण भारत की उत्पादकता बढ़ाएंगे। श्रम प्रधान क्षेत्रों पर शुल्क में कमी से भारत को फायदा, वहीं ईयू को कार और शराब बाजार में आसानी। यह समझौता दोनों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।