
सूरत के टेक्सटाइल बाजारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के पूरा होने से उद्योगपतियों को नई उम्मीदें जग गई हैं। यह समझौता अमेरिकी टैरिफ की मार से निजात दिलाने के साथ-साथ नए अवसर खोल रहा है।
टेक्सटाइल फेडरेशन के प्रमुख कैलाश हाकिम ने कहा कि 18 वर्षों की कूटनीतिक मेहनत का यह फल है। अमेरिका की टैरिफ नीति असफल रही, जबकि यूरोप हमेशा बड़ा बाजार बना रहा। अब यूरोपीय मशीनों का आयात आसान होगा, जो चीनी उपकरणों से कहीं बेहतर हैं।
यूरोप में गारमेंट्स की भारी मांग है। भारत का अब तक 9 प्रतिशत हिस्सा था, जो अब बढ़ेगा। सूरत का मैन-मेड फाइबर विश्वविख्यात है। उद्योग का आकार 150 लाख करोड़ रुपये का है, जो कृषि के बाद सबसे बड़ा राजस्व देता है।
व्यापारी सुशील गुप्ता ने इसे मील का पत्थर बताया। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संभव हुआ यह समझौता। जॉनी राठौड़ ने भी पीएम का आभार जताया। निर्यात बढ़ेगा, गुणवत्ता सुधरेगी और वैश्विक बाजार में भारतीय ब्रांड मजबूत होंगे।
यह एफटीए सूरत सहित पूरे देश के टेक्सटाइल क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आने वाले दिनों में निर्यात में उछाल और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित है।