भारत-ईयू एफटीए: उद्योगों के लिए नई उड़ान, टेक्सटाइल से फुटवियर तक निर्यात-रोजगार में तेजी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने उद्योग जगत में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। विशेषज्ञ इसे अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बता रहे हैं, खासकर टेक्सटाइल, परिधान, फुटवियर...

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने उद्योग जगत में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। विशेषज्ञ इसे अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बता रहे हैं, खासकर टेक्सटाइल, परिधान, फुटवियर और चमड़ा उद्योगों के लिए। इस समझौते से निर्यात में इजाफा, लाखों नौकरियां सृजन और निवेश की बाढ़ आने की पूरी संभावना है, जो 'मेक इन इंडिया' को मजबूत आधार देगा।
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कुमार दुरईस्वामी ने इसे 20 साल पुराने संघर्ष का 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा। सरकारी समर्थन से टेक्सटाइल निर्यात 2030 तक 40 अरब डॉलर छू सकता है, जबकि वर्तमान में यह 13 अरब डॉलर है। तिरुपुर का निटवियर निर्यात 45,700 करोड़ रुपये का है, जो देश के 68 प्रतिशत है। यूरोप को 25,000 करोड़ का निर्यात 50,000 करोड़ हो सकता है।
अमेरिकी टैरिफ से निर्यातकों का हौसला टूटा था, लेकिन ईयू के द्वार खुलने से नई जान फूटी है। बड़े यूरोपीय रिटेलर भारत में फैक्टरियां स्थापित कर रहे हैं। तमिलनाडु का अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल समिट राज्य को वैश्विक पटल पर चमका रहा है।
कोठारी इंडस्ट्रियल के रफीक अहमद ने इसे 'सपने का सच' बताया। ईयू के 25 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी के बाजार से फुटवियर-चमड़ा क्षेत्र को फायदा, जहां 1500 करोड़ निवेश से 25,000 नौकरियां पैदा हो सकती हैं, मुख्यतः महिलाओं के लिए।
डॉ. संजीव सरन ने इसे शानदार कदम कहा, जो टैरिफ हथियारों से हुए नुकसान की भरपाई करेगा। उत्पाद विविधता बढ़ेगी, लेकिन ईयू के सख्त मानकों के लिए तैयार रहना होगा। भारत की स्थिरता निवेशकों को लुभा रही है।
सीईपीसी के मुकेश गोम्बर ने इसे अमेरिकी चुनौतियों के बीच मील का पत्थर बताया, जो नई तकनीक और वैल्यू एडेड निर्यात को बढ़ावा देगा। यह संतुलित डील भारत को वैश्विक चेन में मजबूत बनाएगी।


