
हरियाणा सरकार ने वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी पैनल से हटा दिया है। लगभग 590 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी सामने आने पर यह कदम तत्काल प्रभाव से उठाया गया। अब दोनों बैंक राज्य में कोई सरकारी लेन-देन नहीं कर सकेंगे।
सरकारी आदेश स्पष्ट है- सभी विभाग, बोर्ड, निगम और उपक्रम इन बैंकों से जमा, निवेश या अन्य लेन-देन बंद करें। मौजूदा राशि को फौरन अन्य अधिकृत बैंकों में ट्रांसफर कर खाते बंद करने के निर्देश हैं।
वित्त विभाग ने फिक्स्ड डिपॉजिट नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई। फ्लेक्सी या हाई-इंटरेस्ट एफडी में रखे जाने वाले फंड्स को बचत खातों में डाल दिया गया, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।
भविष्य में ऐसी चूक रोकने को विभागों को सख्ती से शर्तों का पालन, बैंकों की नियमित जांच, मासिक रिकंसिलिएशन और गड़बड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के आदेश दिए गए। 31 मार्च 2026 तक सभी खाते मिलान करें और 4 अप्रैल तक रिपोर्ट दें।
यह कार्रवाई आईडीएफसी के चंडीगढ़ ब्रांच से जुड़े सरकारी खातों में धोखाधड़ी के खुलासे के बाद हुई। बैंक ने बताया कि स्टाफ की अनधिकृत गतिविधियों से 590 करोड़ का नुकसान हुआ। मामला एक विभाग के खाता बंद करने के दौरान पकड़ा गया, जब बैलेंस में अंतर मिला।
बैंक का कहना है कि यह केवल चुनिंदा खातों तक सीमित है। चार अधिकारी सस्पेंड, फॉरेंसिक ऑडिट शुरू। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।