
बेंगलुरु के बिजली ग्रिड पर पश्चिम एशिया के संकट का साया मंडरा रहा है। सरकारी कंपनी गेल ने गुरुवार सुबह 6 बजे से येलाहांका गैस आधारित पावर प्लांट को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी है। 370 मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र पर ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है।
कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) द्वारा संचालित यह प्लांट राज्य का इकलौता गैस-आधारित बिजली उत्पादन इकाई है, जो मुख्यतः बेंगलुरु शहर की बिजली जरूरतों को पूरा करता है। पिछले दिसंबर से लगातार चालू यह प्लांट अब इजरायल-ईरान संघर्ष से उपजी गैस कमी की चपेट में है।
केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना के जरिए गैस आवंटन की प्राथमिकताएं तय की हैं। घरेलू उपयोग को पहली प्राथमिकता, उसके बाद परिवहन ईंधन और उर्वरक क्षेत्र। बिजली उत्पादन को सबसे अंतिम स्थान दिया गया है, जिससे कर्नाटक में उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
राज्य में रोजाना 35.5 करोड़ यूनिट बिजली की मांग है, जो थर्मल, हाइड्रो, सौर, पवन और केंद्रीय ग्रिड से पूरी हो रही है। पंजाब, यूपी, हरियाणा से पावर एक्सचेंज भी मददगार साबित हो रहा है। अधिकारी मानते हैं कि गैस सप्लाई और घटी तो हल्की बाधा आ सकती है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत घरेलू पीएनजी-एलपीजी को 100%, उर्वरक को 70%, उद्योगों को 80% गैस मिलेगी। बिजली क्षेत्र को कम प्राथमिकता से जूझना पड़ेगा। यह संकट भारत की ऊर्जा निर्भरता को उजागर करता है।