
नई दिल्ली। त्योहारों और छुट्टियों के दौरान प्राइवेट एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले अस्थिर हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों की गहन जांच केंद्र सरकार कर रही है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी गई।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विमानन क्षेत्र में अपारदर्शी मूल्य निर्धारण, एल्गोरिदम आधारित शोषणकारी प्राइसिंग और मुफ्त चेक-इन बैगेज सीमा में कटौती को चुनौती दी गई है।
सरकार की ओर से एएसजी अनिल कौशिक ने बताया कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए उच्च स्तरीय चर्चाएं चल रही हैं। सॉलिसिटर जनरल ने बैठक बुलाई है और उच्च अधिकारियों से बातचीत हो रही है। चार सप्ताह का समय देकर जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाएगा।
कोर्ट ने समय दिया और मामला 23 मार्च के लिए स्थगित कर दिया। बेंच ने कहा कि पीक सीजन में किराया उतार-चढ़ाव गंभीर समस्या है। एफआईए की हस्तक्षेप याचिका खारिज करते हुए कहा कि सरकार स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेगी।
सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका में कहा गया कि हवाई यात्रा आवश्यक सेवा होते हुए भी अनियंत्रित मूल्य वृद्धि से महंगी हो रही है। इमरजेंसी या त्योहारी सीजन में किराया दोगुना-तिगुना हो जाता है, जो जरूरी यात्रियों को प्रभावित करता है।
मुफ्त बैगेज 25 से 15 किलो करने से सेवाएं शुल्क आधारित हो गईं। अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताते हुए नियामक ढांचा या स्वतंत्र टैरिफ रेगुलेटर बनाने की मांग की गई है, जो किराया निर्धारण, अनुपालन और शिकायतों का निपटारा करे।
त्योहार नजदीक हैं, इस फैसले से यात्रियों को राहत मिल सकती है और विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।