
केंद्र सरकार ने वर्तमान फसल चक्र में खाद के गलत उपयोग और डायवर्जन को रोकने के लिए अभूतपूर्व कार्रवाई की है। खरीफ और रबी 2025-26 सीजन के दौरान 14,692 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 6,373 लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए तथा 766 एफआईआर दर्ज हुईं। यह कदम किसानों के हितों की रक्षा और राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
खाद विभाग ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से राज्यों और जिलों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया, जिसमें छापेमारी और त्वरित कानूनी प्रक्रियाएं शामिल रहीं। इन प्रयासों से खाद की समयबद्ध उपलब्धता, बाजार अनुशासन और वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत हुई है।
असंतुलित खाद उपयोग का असर मिट्टी की उर्वरता तक सीमित नहीं, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा करता है। पोषक तत्वों से वंचित मिट्टी पर उगाई फसलें पशु चारे के लिए आवश्यक खनिजों से रहित होती हैं, जिससे पशुओं की उत्पादकता प्रभावित होती है। यह कृषि प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है।
टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने हेतु संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रमुख रणनीति बनाया गया है। मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड योजना के माध्यम से किसानों को अपनी भूमि के पोषक स्थिति और भौतिक गुणों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाती है। फसल-विशिष्ट रासायनिक उर्वरक, बायोफर्टिलाइजर, जैविक खाद एवं मिट्टी सुधार के दिशानिर्देश दिए जाते हैं।
जुलाई 2025 तक 93 हजार से अधिक किसक प्रशिक्षण, 6.8 लाख क्षेत्रीय प्रदर्शन और असंख्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हो चुके थे। नवंबर 2025 के मध्य तक 25.55 करोड़ मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरित हो चुके हैं, जो संतुलित पोषण प्रबंधन में योजना की सफलता को दर्शाते हैं।