
गल्फ क्षेत्र में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण तेल कीमतों में तेजी आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार हिल गया है। जी-7 देशों के वित्त मंत्री सोमवार को होने वाली बैठक में आपातकालीन पेट्रोलियम भंडारों की समन्वित रिहाई पर विचार-विमर्श करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जी एजेंसी (आईईए) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शरीक होंगे। चर्चा का केंद्र बिंदु युद्ध का वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने वाला प्रभाव होगा। अमेरिका सहित तीन जी-7 देशों ने पहले ही रणनीतिक भंडार से तेल छोड़ने का समर्थन जता दिया है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 300-400 मिलियन बैरल तेल की रिहाई सटीक कदम हो सकता है, जो आईईए सदस्यों के 1.2 बिलियन बैरल भंडार का 25-30 प्रतिशत होगा। ये भंडार 1974 के अरब तेल प्रतिबंध के बाद बनाए गए थे, जब ईंधन संकट ने दुनिया को झकझोर दिया था।
आईईए के नियमों के तहत सदस्य देशों को ये रणनीतिक स्टॉक बनाए रखना होता है, ताकि आपूर्ति में गंभीर बाधा आने पर एकजुट होकर जवाब दिया जा सके। एजेंसी के गठन के बाद पांच बार ऐसी सामूहिक रिलीज हो चुकी है, जिसमें 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में सबसे ताजा कार्रवाई शामिल है।
सोमवार की बैठक से ठीक पहले आईईए ने आपूर्ति संकट पर आपात चर्चा की थी। तैयार दस्तावेजों में स्पष्ट कहा गया है कि आईईए ‘तेल बाजार की स्थिरता के लिए कार्रवाई करने को तैयार है’। बढ़ती कीमतों से जूझते उपभोक्ताओं के लिए यह बैठक राहत की उम्मीद जगाती है।