
देशभर में दूध में मिलावट की बेलगाम घटनाओं को रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार को जारी निर्देशों के तहत सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को संचालन से पहले अनिवार्य लाइसेंस या पंजीकरण लेना होगा। डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को इससे छूट दी गई है।
एफएसएसएआई के बयान में स्पष्ट कहा गया कि इसका मकसद मिलावट रोकना, खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करना और स्वच्छ भंडारण व आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना है। इससे जन स्वास्थ्य की रक्षा होगी।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष पंजीकरण अभियान चलाने और प्रवर्तन जांच सख्ती से करने के आदेश दिए गए हैं। केंद्र व राज्य स्तरीय एजेंसियों को दूध व्यवसायों के लाइसेंस सत्यापन का जिम्मा सौंपा गया है।
हाल ही में संसद में खाद्य मिलावट का मुद्दा गरमाया था। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कंपनियों पर हानिकारक पदार्थों को झूठे दावों के साथ बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने दूध में यूरिया, सब्जियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में स्टार्च-कॉस्टिक सोडा, आइसक्रीम में डिटर्जेंट, जूस में कृत्रिम रंग-स्वाद, तेल में मशीन ऑयल, मसालों में ईंट पाउडर-लकड़ी का बुरादा, चाय में रंग और पोल्ट्री में स्टेरॉयड की पोल खोली।
यहां तक कि देशी घी की मिठाइयां भी डालडा से बन रही हैं। एफएसएसएआई के इस फैसले से डेयरी क्षेत्र में पारदर्शिता आएगी। विशेष अभियान से सभी के पास प्रमाणपत्र सुनिश्चित होगा। उपभोक्ताओं का विश्वास बहाल होगा और मिलावटबाजों की कमर टूटेगी।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। ये नियम गुणवत्ता पर जोर देकर उद्योग को नई दिशा देंगे।