
देश में हाल के वर्षों में सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर उल्लेखनीय सफलताएं हासिल हुई हैं। पेंशन और बीमा कवरेज में तेजी से इजाफा हुआ है, जो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण से सामने आया है।
आईआरडीएआई और पीएफआरडीए जैसे नियामक संस्थानों ने वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। इन प्रयासों से लाखों लोगों का जीवन सुरक्षित हुआ है।
पीएफआरडीए ने बहु-स्तरीय पेंशन प्रणाली की मजबूत आधारशिला रखी है। इसमें बाजार-आधारित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस), 2025 में शुरू यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस), कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) प्रमुख हैं।
31 दिसंबर 2025 तक एनपीएस के 211.7 लाख ग्राहक थे और प्रबंधित संपत्ति 16.1 लाख करोड़ रुपये की थी। वित्तीय वर्ष 15 से 25 तक ग्राहकों में 9.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई, जबकि संपत्ति प्रबंधन में 37.3 प्रतिशत की दर से उछाल आया।
एपीवाई में 2016 से अब तक ग्राहक 43.7 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़े, जबकि संपत्ति 64.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई। बीमा क्षेत्र ‘2047 तक सभी का बीमा’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
आईआरडीएआई का सिद्धांत-आधारित ढांचा नियमों को सशक्त बनाता है, अनुपालन बोझ घटाता है और कंपनियों को नवाचार की स्वतंत्रता देता है। गैर-जीवन बीमा में स्वास्थ्य बीमा 41 प्रतिशत प्रीमियम के साथ शीर्ष पर है।
वित्त वर्ष 2021 से 2025 तक नेट क्लेम 70 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गए। जीवन बीमा के पास 91 प्रतिशत संपत्ति और 75 प्रतिशत प्रीमियम है, जिसमें 6.3 लाख करोड़ का लाभ वितरण हुआ।
जीएसटी छूट से पॉलिसी सस्ती हुईं। ‘सबका बीमा सबकी सुरक्षा अधिनियम 2025’ और 100 प्रतिशत एफडीआई से क्षेत्र का विस्तार सुनिश्चित होगा। यह प्रगति सामाजिक सुरक्षा की मजबूत नींव रखती है।