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मांग-आपूर्ति असंतुलन से कच्चा तेल 70 डॉलर के नीचे रहेगा

नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अल्पकाल में हल्की तेजी दिखा सकती हैं, लेकिन दीर्घकाल में 68-70 डॉलर प्रति बैरल की सीमा में ही रहेंगी। एमके वेल्थ मैनेजमेंट की ताजा रिपोर्ट में इसकी भविष्यवाणी...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|बिजनेस|
February 3, 2026
मांग-आपूर्ति असंतुलन से कच्चा तेल 70 डॉलर के नीचे रहेगा
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नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अल्पकाल में हल्की तेजी दिखा सकती हैं, लेकिन दीर्घकाल में 68-70 डॉलर प्रति बैरल की सीमा में ही रहेंगी। एमके वेल्थ मैनेजमेंट की ताजा रिपोर्ट में इसकी भविष्यवाणी की गई है।

बाजार के मूलभूत सिद्धांतों से संकेत मिलते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्त गति से उपभोक्ता सतर्क हैं। ओपेक+ के उत्पादन प्रतिबंधों के बावजूद ब्रेंट क्रूड एक साल से 60-65 डॉलर के दायरे में अटका हुआ है। मांग में कमी और आपूर्ति में इजाफे का अंतर कीमतों को दबाए रख रहा है।

पूर्वानुमान बताते हैं कि मांग उत्पादन वृद्धि से पिछड़ रही है। लंबे समय से कम कीमतों ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश घटा दिया है। प्रमुख कंपनियां नकदी और बैलेंस शीट मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। वेनेजुएला व ईरान से उत्पादन बहाल होने से एशिया, खासकर चीन को फायदा हो रहा है।

फिर भी, भू-राजनीतिक बदलाव आपूर्ति की निरंतरता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एमके वेल्थ के रिसर्च हेड डॉ. जोसेफ थॉमस कहते हैं, "राजनीतिक घटनाएं अल्पकालिक समर्थन देंगी, लेकिन बुनियादी कमजोरी हावी रहेगी।"

उन्होंने ऊर्जा कंपनियों को पूंजी अनुशासन और दक्षता पर फोकस करने की सलाह दी। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुमान में 2026 तक वैश्विक भंडार बढ़ने और ब्रेंट की औसत कीमत 55 डॉलर रहने का कहा गया है।

यह भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत है, जो महंगाई पर नियंत्रण रखेगा। निवेशक कुशल कंपनियों पर नजर रखें।

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