
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की इक्विटी निवेश सीमा में महत्वपूर्ण वृद्धि को हरी झंडी दे दी है। अब कंपनी प्रत्येक सहायक कंपनी में 7,500 करोड़ रुपये तक निवेश कर सकेगी, जो पहले 5,000 करोड़ की सीमा से अधिक है।
कुल संपत्ति के 15 प्रतिशत की मौजूदा सीमा को यथावत रखा गया है। यह फैसला लोक उद्यम विभाग के 2010 के दिशानिर्देशों के अनुरूप है।
देश की सबसे बड़ी ट्रांसमिशन कंपनी पावरग्रिड को इससे अपने कोर बिजनेस में निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में एकीकृत करने के लिए यूएचवीएसी और एचवीडीसी जैसी महंगी परियोजनाओं में भागीदारी आसान हो जाएगी।
यह कदम 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होगा। टीबीसीबी प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बेहतर टैरिफ सुनिश्चित होगा, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली के रूप में मिलेगा।
हालिया तीसरी तिमाही के नतीजे भी उत्साहजनक हैं। स्टैंडअलोन पीएटी 6.8 प्रतिशत चढ़कर 4,160.17 करोड़ रुपये रहा। राजस्व 11,005.28 करोड़ पर पहुंचा। निदेशक मंडल ने 3.25 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश मंजूर किया, जो 27 फरवरी 2026 को वितरित होगा।