
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आर्थिक विकास की धुरी बनाते हुए कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। रविवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि ये छोटे कारोबार अब बड़े पैमाने पर विस्तार करेंगे, वैश्विक बाजारों में चुनौती देंगे और घरेलू-विदेशी बाजारों से मजबूती से जुड़ेंगे।
एमएसएमई देश की मैन्युफैक्चरिंग का 35.4 प्रतिशत, निर्यात का 48.58 प्रतिशत और जीडीपी में 31.1 प्रतिशत योगदान देते हैं। 7.47 करोड़ इकाइयों से 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है, जो कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार सृजन क्षेत्र है।
बजट में तीन प्रमुख कर्तव्य निर्धारित हैं – तेज विकास, जनआकांक्षाओं की पूर्ति और क्षेत्रीय क्षमता वृद्धि। पहले कर्तव्य के तहत इक्विटी समर्थन, नकदी प्रवाह सुधार और विशेषज्ञ सलाह पर जोर दिया गया।
10,000 करोड़ रुपये का विशेष एसएमई ग्रोथ फंड छोटे उद्योगों के विस्तार को गति देगा। आत्मनिर्भर भारत फंड को 2,000 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे, जो 30 नवंबर 2025 तक 682 एमएसएमई को 15,442 करोड़ का निवेश दे चुका है।
टीआरईडीएस से 7 लाख करोड़ से अधिक राशि जारी हो चुकी है। अब सीपीएसई के लिए यह अनिवार्य होगा। सीजीटीएमएसई बिल छूट पर गारंटी देगी, जीईएम को टीआरईडीएस से जोड़ा जाएगा और बिलों को एसेट बैक्ड सिक्योरिटीज बनाकर बाजार में नकदी बढ़ेगी।
ये उपाय एमएसएमई को आत्मनिर्भर भारत का मजबूत स्तंभ बनाएंगे, रोजगार और विकास को नई उड़ान देंगे।