
नई दिल्ली में केंद्रीय बजट 2026 की घड़ी करीब आती जा रही है। उद्योग जगत की नजरें मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई योजनाओं, निर्यात प्रोत्साहन और निवेश बढ़ाने वाली नीतियों पर केंद्रित हैं। जेटवर्क के को-फाउंडर व सीईओ अमृत आचार्य ने विशेष बातचीत में सरकार से कई महत्वपूर्ण अपेक्षाएं जताईं, जो अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती हैं।
आचार्य ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में लगातार वृद्धि आवश्यक है। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर परियोजनाओं पर सरकारी खर्च मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में मांग पैदा करता है। सरकार प्रमुख खरीदार के रूप में घरेलू उद्योगों को मजबूत समर्थन देती है।
पिछले वर्षों में सार्वजनिक निवेश बढ़ा है, जिससे उद्योगों को ऑर्डर, रोजगार और आर्थिक उछाल मिला। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश विकास का आधार है।
पीएलआई योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स में उत्पादन को बढ़ावा दिया। अब ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक बाजार के लिए तैयार करने की जरूरत है। निर्यातकों के लिए विशेष बीमा व क्रेडिट स्कीम्स लानी चाहिए, जैसा चीन में है।
भारत में पूंजी की ऊंची लागत एक चुनौती है। इसे कम करने से निवेश बढ़ेगा। नीतिगत माहौल सहयोगी है, पीएलआई इसका प्रमाण। भारत अब आईफोन का शीर्ष निर्यातक है। पीएलआई 2.0 कंपोनेंट उत्पादन पर फोकस करेगा।
बजट से दो मुख्य उम्मीदें: कैपेक्स में इजाफा और निर्यात प्रोत्साहन। ये कदम मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएंगे।