
नई दिल्ली में मंगलवार को नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के भविष्य पर महत्वपूर्ण बातें कही। अपनी नई पुस्तक ‘स्मार्टर दैन द स्टॉर्म’ के लोकार्पण के दौरान उन्होंने कहा कि एआई तभी अपनी पूरी क्षमता दिखा पाएगी जब यह बहुभाषी हो जाएगी। यानी यह स्थानीय बोलियों से लेकर वैश्विक भाषाओं तक सबको समझ सके और उनमें बातचीत कर सके।
जी20 के पूर्व शेरपा कांत ने भारत की उभरती तकनीकों में नेतृत्व की महत्वाकांक्षा पर जोर दिया। पुस्तक का मुख्य फोकस एआई और नई तकनीकों से अर्थव्यवस्थाओं व शासन व्यवस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा, ‘अब जरूरी है कि एआई को नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर, पवन और स्वच्छ ऊर्जा वाले मॉड्यूलर सिस्टम से जोड़ा जाए। अनुकूलनशीलता भी जरूरी है, जिसके लिए सॉफ्टवेयर पर सही निर्देश दें।’
सह-लेखक सिद्धार्थ सिन्हा ने भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन की सराहना की, जो कंप्यूटिंग और डेटा सेट्स को सबके लिए उपलब्ध करा रहा है। हाल के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने भारत को वैश्विक एआई पटल पर मजबूती से स्थापित किया है।
सिन्हा ने कहा कि सामाजिक चुनौतियों के हल जमीनी स्तर से ही आएंगे। एआई बाढ़-आग की भविष्यवाणी से लेकर डेटा सेंटरों की दक्षता बढ़ाने तक हर क्षेत्र में उपयोगी है, लेकिन इसकी ऊर्जा खपत पर भी नजर रखनी होगी।
यह पुस्तक वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में निर्णय लेने वालों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शक है। जलवायु कार्रवाई, एआई नवाचार, शासन सुधार और आर्थिक रणनीतियों को जोड़ते हुए यह व्यापारिक नेता, नीति निर्माता और उद्यमियों के लिए अनिवार्य पढ़ने की सामग्री है।