
बेंगलुरु में राज्यसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने बीजेपी पर जोरदार प्रहार किया, उसे ऑपरेशन लोटस का सूत्रधार और विधायकों की खरीद-फरोख्त में माहिर बताते हुए। ओडिशा के 14-15 विधायकों के बेंगलुरु के बाहरी इलाके में रिसॉर्ट में ठहरने के मामले ने यह विवाद जन्म दिया है।
विधान सौध और बिदादी रिसॉर्ट में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने कहा कि राजनीति में सभी दलों को विधायकों के पोतिंग का भय सताता है। ‘वे यहां आए हैं तो हमारी जिम्मेदारी है सहयोग करना। हमारे विधायकों के साथ मैंने उनसे भेंट की।’ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के कांग्रेस के अपने विधायकों पर अविश्वास वाले बयान पर पलटवार करते हुए पूछा, ‘फिर कर्नाटक में ऑपरेशन लोटस क्यों चलाया?’
यह कोई हाईकमान का आदेश नहीं, बल्कि चुनावी दबावों का नतीजा है। ‘ओडिशा पीसीसी प्रमुख ने फोन पर बताया कि धर्मनिरपेक्ष दल एकजुट हैं, बीजेपी की चालाकी का खतरा है। विधायकों पर लालच के जाल बिछाए जा रहे हैं।’ बेंगलुरु का सुरक्षित माहौल प्रदान करने पर विधायक प्रसन्न हैं। नए सदस्य भी स्वेच्छा से शामिल हुए। बीजेडी, सीपीआई के साथ संयुक्त उम्मीदवार उतारकर बीजेपी को चुनौती।
समस्या समाधानकर्ता की भूमिका पर उन्होंने कहा कि मगदी बालकृष्ण और सीपी योगेश्वर जैसे अनुभवी नेता वहां हैं, उन्हें स्वतंत्रता दी गई। ‘सभी की रक्षा हमारा कर्तव्य। कोई पहुंच ही नहीं सकता।’ गुजरात चुनावों की याद दिलाई गई तो महत्वाकांक्षाओं पर टालते हुए बोले, ‘कड़ी मेहनत के फल अवश्य मिलते हैं, सपने क्यों देखें?’
यह घटना चुनावी रणनीतियों की गहराई दर्शाती है, जहां कांग्रेस बीजेपी के पोतिंग तीरों से मुकाबला करने को तैयार है।