
गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की झारखंड यात्रा पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने गोगोई द्वारा झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन से समर्थन मांगने को असम की राजनीति में बाहरी हस्तक्षेप करार दिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि असम के राजनीतिक फैसले राज्य के बाहर से निर्देशित नहीं हो सकते। पत्रकारों से बातचीत में सरमा ने कहा, ‘मैंने कभी किसी असमिया नेता को झारखंड जाकर राज्य के मामलों पर चर्चा करते नहीं देखा। असम की सियासत अपनी मिट्टी से चलती है।’
जानकारी के मुताबिक, गोगोई वरिष्ठ कांग्रेसी जितेंद्र सिंह के साथ दिल्ली से रांची रवाना हुए। इस यात्रा का मकसद सोरेन को अखिल गोगोई की रायजोर दल के बजाय असम में कांग्रेस को समर्थन देने के लिए मनाना था।
यह घटनाक्रम रायजोर दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और जय भारत पार्टी के बीच बढ़ते गठजोड़ की अफवाहों के बीच घटित हुआ। छह मार्च को गुवाहाटी में अखिल गोगोई के आवास पर झारखंड के कैबिनेट मंत्री चामरा लिंडा और आदिवासी संगठन के महासचिव विश्वनाथ तिर्की के साथ गुप्त बैठक हुई थी।
बैठक में असम में संभावित गठबंधन पर विचार-विमर्श हुआ। इस सप्ताह हेमंत सोरेन का असम दौरा और जय भारत पार्टी की बैठक में शिरकत ने इन अटकलों को बल दिया।
सरमा ने इन घटनाओं को चुनावी preparation का हिस्सा बताते हुए कहा कि अंततः असम की जनता ही राजनीतिक दिशा निर्धारित करेगी। कांग्रेस का यह कदम क्षेत्रीय दलों के उभार के बीच समर्थन आधार मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा लगता है।
