
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने एक विशेष सीमेंट मोर्टार विकसित किया है, जो घातक परमाणु विकिरण को पूरी तरह रोक सकता है। यह स्वदेशी आविष्कार न केवल संरचनाओं को लोहे जैसी मजबूती प्रदान करता है, बल्कि चेरनोबिल और फुकुशिमा जैसी भयानक घटनाओं से सीख लेते हुए सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।
सिविल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने सामान्य सीमेंट में चार महत्वपूर्ण सूक्ष्म कणों का मिश्रण किया है- बोरॉन ऑक्साइड, लेड ऑक्साइड, टंगस्टन ऑक्साइड और बिस्मथ ऑक्साइड। बोरॉन ने विकिरण अवशोषण को कई गुना बढ़ाया, लेड ने घनत्व प्रदान किया, टंगस्टन ने दरार प्रतिरोध क्षमता मजबूत की और बिस्मथ ने बहुविध सुरक्षा सुनिश्चित की। यह ‘सुपर मोर्टार’ भूकंप, विस्फोट या तीव्र गर्मी में भी अटल खड़ा रहता है।
प्रोफेसर हृषिकेश शर्मा ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य ऐसी सामग्री बनाना है जो भयंकर परिस्थितियों में भी चट्टान की तरह अडिग रहे।’ मटेरियल्स एंड स्ट्रक्चर्स जर्नल में प्रकाशित इस शोध में उनके छात्र संचित सक्सेना और सीएसआईआर-रुड़की के डॉ. सुमन कुमार का योगदान सराहनीय है।
अगले चरण में बड़े पैमाने पर कंक्रीट परीक्षण, संरचनात्मक मूल्यांकन और कण अनुकूलन पर काम होगा। यह मोर्टार परमाणु रिएक्टरों, छोटे मॉड्यूलर यूनिटों, अस्पतालों के एक्स-रे कक्षों और कैंसर चिकित्सा केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाएगा। बढ़ती बिजली मांग और जलवायु लक्ष्यों के बीच परमाणु बुनियादी ढांचे के लिए यह वरदान साबित होगा, विकिरण रिसाव के जोखिम को न्यूनतम कर विश्वसनीय संरक्षण प्रदान करेगा।