
पटना, 12 मार्च। बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक मर्यादा की गिरती सीढ़ी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव शुरू से ही विफल होने वाला था, फिर भी कांग्रेस समेत विपक्ष ने इसे लाकर अपनी गिरती साख को और उजागर कर दिया।
मीडिया से बातचीत में यादव ने कटाक्ष किया, “सबको पता था कि यह पास नहीं होगा। स्पीकर जैसे संवैधानिक पद पर हमला राजनीति में भारी गिरावट दर्शाता है। कांग्रेस का स्तर तो पैमाने से नीचे चला गया है।” उन्होंने सवाल किया कि जब नतीजा तय था तो ऐसा कदम क्यों? स्पीकर का सम्मान हर हाल में होना चाहिए, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
भारतीय संसदीय इतिहास पर प्रकाश डालते हुए यादव ने बताया कि स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव बेहद दुर्लभ है। “मुझे याद है, केवल प्रथम लोकसभा अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ एक बार ऐसा हुआ था। विपक्ष ने कभी पहले ऐसा हौसला नहीं दिखाया।” संसद में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन स्पीकर को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने क्या गलती की? कोई षड्यंत्र तो नहीं रचा?
बुधवार को 13 घंटे की बहस के बाद लोकसभा ने ध्वनि मत से प्रस्ताव ठुकरा दिया। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन संचालन में निष्पक्षता न बरतने का आरोप लगाया था, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि स्पीकर पूरे सदन के प्रतिनिधि होते हैं, किसी एक दल के नहीं।
शाह ने चेताया कि स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को ठेस पहुंचाता है। “लोकसभा विश्व का प्रमुख लोकतांत्रिक मंच है। इसके प्रमुख की सत्यनिष्ठा पर प्रहार हमारी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े करता है।” चार दशक बाद ऐसा प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। यह घटना राजनीतिक परिपक्वता की मांग करती है।