
वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से टैरिफ नीति पर झटके के बाद अब यूएस ने नया रुख अपनाया है। 16 देशों के खिलाफ व्यापारिक जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें भारत भी शामिल है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता बनाने के आरोप में ये देश निशाने पर हैं। जांच पूरी होने पर टैरिफ या अन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने घोषणा की कि नामित देशों की नीतियां उत्पादन और निर्यात को अनुचित रूप से बढ़ावा दे रही हैं, जो अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि ये पार्टनर बाजार मांग से अधिक क्षमता बना रहे हैं, जिससे अधिशेष उत्पादन और व्यापार असंतुलन पैदा हो रहा है।
चीन, यूरोपीय संघ, जापान, मैक्सिको, वियतनाम, कोरिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, ताइवान, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, कंबोडिया और भारत—ये सभी जांच के दायरे में हैं। ऑटो, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, मशीनरी और सोलर मॉड्यूल जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहेगा।
ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत चल रही यह जांच सब्सिडी, सरकारी हस्तक्षेप और बाजार बाधाओं की पड़ताल करेगी। 17 मार्च से पब्लिक कमेंट्स शुरू, 15 अप्रैल तक सबमिशन और 5 मई को वॉशिंगटन में सुनवाई होगी।
अमेरिका का मानना है कि ऐसी क्षमता वैश्विक व्यापार को विकृत कर रही है। भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि निर्यात-आधारित विकास पर असर पड़ सकता है। जांच के नतीजे व्यापार संबंधों को नया आकार दे सकते हैं।