
रात के गहरे सन्नाटे में अचानक भूख का अटैक होना आम बात हो गई है। बिस्किट, नूडल्स जैसे पैक्ड फूड्स से इसे शांत करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह नाइट ईटिंग सिंड्रोम का लक्षण है। दिन में ज्यादा खाने पर काबू रहता है, मगर रात को बिना खाए जीना मुश्किल।
यह खराब दिनचर्या, देर रात जागने और अग्नि असंतुलन से जुड़ा है। आयुर्वेद मानता है कि रात शरीर की मरम्मत का समय है। बार-बार खाना पचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, वजन बढ़ाता है और सुबह भारीपन लाता है। नींद खराब होने से पूरा दिन सुस्ती घेर लेती है।
समाधान सरल हैं। सूर्यास्त से पहले हल्का भोजन करें, तला-भुना त्यागें। सोने से पहले गुनगुना दूध पिएं, जो नींद न्योता देता है। मोबाइल से दूर रहें, क्योंकि इसकी रोशनी नींद चुरा लेती है।
जीवनशैली सुधारने के लिए योग, समयबद्ध भोजन और तनाव प्रबंधन अपनाएं। अगर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लें। इन उपायों से नाइट हंगर पर काबू पाकर स्वस्थ जीवन जिएं।