
हुगली, अजय और दामोदर नदियों के मध्य बसी बर्धमान पूर्व पश्चिम बंगाल का धान का कटोरा है, जहां हरियाली राजनीतिक रंगमंच को रंगती है। 2017 में जिले के विभाजन से जन्मी यह एससी आरक्षित लोकसभा सीट सात विधानसभा क्षेत्रों को समाहित करती है। पूर्व की उपजाऊ मिट्टी धान-आलू-सरसों उगाती है, पश्चिम लाल मिट्टी चुनौतियां देती है।
85 प्रतिशत ग्रामीण आबादी, 73.75 प्रतिशत हिंदू, 25.14 प्रतिशत मुस्लिम—यहां अल्पसंख्यक वोट निर्णायक हैं। एससी समुदाय में नामशूद्र (80% साक्षर, प्रभावशाली) बनाम बाग्दी-बाउरी (38-60% साक्षरता, मजदूर)—कल्याण योजनाओं का केंद्र।
राइस मिल अर्थव्यवस्था की धुरी, लेकिन शिल्पा सेतु (334 करोड़) और कालना-शांतिपुर पुल (1098 करोड़) भूगोल बदलेंगे, तंत साड़ी बुनकरों को बाजारों से जोड़ेंगे।
2021 में टीएमसी का सातों सीटों पर कब्जा: रैना (शंपा धारा), जमालपुर (आलोक माझी), कालना (देबोप्रसाद बाग), मेमारी (मधुसूदन भट्टाचार्य), पुरबस्थली दक्षिण (स्वपन देबनाथ), पुरबस्थली उत्तर (तपन चटर्जी), कटवा (रवींद्रनाथ चटर्जी)।
2014 में टीएमसी-वाम लड़ाई, 2019 में भाजपा का उदय (38.32%), टीएमसी का अंतर सिमटा। 2024 में ममता का मास्टरस्ट्रोक—डॉ. शर्मिला सरकार ने भाजपा को 1.6 लाख वोटों से हराया।
क्या विकास टीएमसी के किले को हिला पाएगा? ममता की परीक्षा जारी।