
वाशिंगटन। अमेरिकी सीनेट की एजिंग कमेटी की बैठक में सांसदों और विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि चीन से दवाओं के महत्वपूर्ण कच्चे माल और सामग्रियों पर अमेरिका की अत्यधिक निर्भरता देश की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
बुधवार को हुई इस चर्चा में बताया गया कि दशकों से फार्मा उत्पादन को विदेश स्थानांतरित करने से अमेरिका सप्लाई चेन की कमजोरियों का शिकार हो गया है। कमेटी चेयरमैन सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि यह समस्या एंटीबायोटिक्स, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी जीवनरक्षक दवाओं तक फैली हुई है।
“वाशिंगटन की नीतियों ने चीन को वैश्विक सप्लाई चेन पर कब्जा करने का मौका दिया,” स्कॉट ने कहा। उन्होंने सस्ते उत्पादन को प्राथमिकता देने वाली नीतियों पर निशाना साधा। रैंकिंग मेंबर कर्स्टन गिलिब्रैंड ने चीन-भारत पर निर्भरता को रेखांकित करते हुए कहा कि सब्सिडी, सस्ता श्रम और कमजोर नियमों ने इसे बढ़ावा दिया।
“बाजार कीमतों को प्राथमिकता देता है, गुणवत्ता को नहीं,” उन्होंने कहा और एफडीए को विदेशी प्लांट्स पर सख्ती के अधिकार देने की मांग की। पूर्व सांसद टेड योहो ने चीन के बाजार नियंत्रण को स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
चाइना आरएक्स की लेखिका रोजमेरी गिब्सन ने अमेरिकी सेना के टेस्ट का हवाला दिया जहां 13 जेनेरिक दवाओं में से 15 प्रतिशत गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। फिर भी उन्होंने चीनी निर्यात रुकने के जोखिम पर आगाह किया।
ड्यूक-मार्गोलिस के चैन हरजीवन ने सप्लाई चेन मजबूत करने की सलाह दी। यह चर्चा अमेरिका के लिए नीतिगत बदलाव की मांग को तेज कर रही है ताकि दवाओं की आपूर्ति सुरक्षित हो सके।