
ईरान युद्ध के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने 29 अन्य देशों संग मिलकर लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा की मांग की है। बुधवार को जारी संयुक्त बयान में सभी पक्षों से कहा गया कि हर हाल में यूएनआईफिल के सैनिकों और उनके ठिकानों की हिफाजत सुनिश्चित की जाए, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप हो।
बयान में जोर दिया गया कि शांति सैनिकों पर हमले या धमकियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। साथ ही उनके साहस, निष्ठा और कर्तव्य पालन की तारीफ की गई। यूएनआईफिल में 7,438 सैनिक हैं, जिनमें भारत के 642 जवान दूसरी सबसे बड़ी टुकड़ी हैं।
1978 में स्थापित यह मिशन संघर्ष विराम की निगरानी और दक्षिणी लेबनान पर लेबनान सरकार के नियंत्रण में सहायता करता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक से ठीक पहले फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश की उपस्थिति में यह बयान पढ़ा।
पिछले सप्ताह दक्षिणी लेबनान के एक केंद्र पर गोलीबारी में तीन घाना सैनिक घायल हुए। इसकी निंदा करते हुए जिम्मेदारों को सजा की मांग की गई, जबकि जांच जारी है।
हिजबुल्लाह की इजरायल पर ईरान समर्थित हमलों में भागीदारी को गैरजिम्मेदार बताया गया, जिसने लेबनान को अवांछित युद्ध में धकेल दिया। इजरायल से नागरिक क्षेत्रों पर हमले बंद करने और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा गया।
सभी को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून मानने और नागरिकों की रक्षा करने का निर्देश दिया गया। यूएन के जीन-पियरे लैक्रोइक्स ने बताया कि 1 मार्च से ब्लू लाइन पर 4,120 हमले दर्ज हुए हैं। हिजबुल्लाह के दैनिक रॉकेट हमलों के जवाब में इजरायली घुसपैठ और झड़पें बढ़ी हैं, जो स्थिति को और जटिल बना रही हैं।