
नई दिल्ली। आईपीएल 2026 की तैयारियों से पहले महेंद्र सिंह धोनी को बड़ी न्यायिक जीत मिली है। बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर जस्टिस अरुण मिश्रा ने पूर्व भारतीय कप्तान के खिलाफ दर्ज हितों के टकराव वाली शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि बोर्ड के किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।
फरवरी 2024 में दाखिल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि धोनी सक्रिय खिलाड़ी होने के साथ-साथ क्रिकेट एकेडमी के मालिक भी हैं, जो नियम 38(4)(ए) और 38(4)(पी) का स्पष्ट उल्लंघन है। साथ ही 2018 के बाद नियम 38(2) व 38(5) के तहत खुलासा न करने का भी दावा किया गया।
जस्टिस मिश्रा के विस्तृत आदेश में धोनी की आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी एकेडमी को स्वीकार किया गया। लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि समझौता 2017 में हुआ, जबकि नियम सितंबर 2018 में लागू हुए। “धोनी के कप्तानी या खिलाड़ी के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के समय कोई टकराव नहीं था।”
शिकायतकर्ता के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि यह वास्तविक नियामकीय चिंता नहीं, बल्कि निजी विवाद है। कोई संस्थागत नियंत्रण, पक्षपात या विशेष व्यवहार का प्रमाण नहीं मिला। शिकायत देरी से दाखिल की गई थी और व्यावसायिक झगड़े से प्रेरित लगती है।
इस फैसले से धोनी को नई ऊर्जा मिलेगी। चेन्नई सुपर किंग्स और प्रशंसकों के लिए यह राहत की सांस है, जो उनके भविष्य के क्रिकेट सफर को मजबूत बनाएगा।