
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मिस्र ने क्षेत्रीय शांति के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने जॉर्डन, बहरीन और ईरान के समकक्षों से फोन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने संघर्ष को रोकने और स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील की।
अमेरिका-समर्थित इजरायल के ईरान पर हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई से उपजा यह संकट पूरे इलाके को अस्थिर करने का खतरा पैदा कर रहा है। अब्देलाती ने कहा कि संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना होगा ताकि युद्ध का विस्तार न हो।
ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची के साथ बातचीत में दोनों ने पड़ोसी देशों को प्रभावित होने से बचाने पर बल दिया। अब्देलाती ने संप्रभुता का सम्मान और पड़ोसी संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
मिस्र के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सैन्य कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सामूहिक प्रयासों की वकालत की।
5 मार्च को राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने भी इस संकट पर चिंता जताई। सैन्य अकादमी में बोलते हुए उन्होंने गलत फैसलों को युद्ध का कारण बताया और मिस्र की मध्यस्थता भूमिका का उल्लेख किया।
सिसी ने मिस्र के धैर्य की सराहना की, जो कई चुनौतियों के बावजूद सफल रहा। उन्होंने आर्थिक प्रभावों की चेतावनी दी और कीमतों में हेरफेर न करने की अपील की। आपातकाल जैसी स्थिति में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने का वचन दिया।
मिस्र की यह पहल मध्य पूर्व में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।