
टोक्यो में जारी पश्चिम एशिया के तनाव के बीच जापान ने ईंधन कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बुधवार को घोषणा की कि सोमवार से देश अपने रणनीतिक तेल भंडारों से तेल निकालना शुरू कर देगा, बिना अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के समन्वय का इंतजार किए।
यह फैसला ऐतिहासिक है, क्योंकि 1978 से तेल भंडारण की शुरुआत के बाद जापान पहली बार अकेले सरकारी भंडार खाली कर रहा है। ताकाइची ने पत्रकारों से कहा कि पहले निजी क्षेत्र के 15 दिनों के भंडार और फिर सरकारी एक महीने के स्टॉक को बाजार में उतारा जाएगा।
जापान की मध्य पूर्व पर 90 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल की निर्भरता इसे संवेदनशील बनाती है। होर्मुज जलसंधि पर खतरे के कारण आयात प्रभावित हो सकते हैं। फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद ईरानी जवाबी कार्रवाई ने तेल-गैस आपूर्ति बाधित कर दी।
बिना हस्तक्षेप के पेट्रोल की खुदरा कीमत 200 येन प्रति लीटर से ऊपर चली जाएगी। सरकार सब्सिडी से इसे 170 येन पर स्थिर रखेगी। ताकाइची ने कहा, ‘हम लचीले ढंग से सहायता उपायों की समीक्षा करेंगे, ताकि लंबे संकट में भी जनता को राहत मिले।’
दिसंबर अंत तक जापान के पास 470 मिलियन बैरल तेल था, जो 254 दिनों की खपत के बराबर है। इसमें सरकारी 146 दिन, निजी 101 दिन और बाकी साझा भंडार शामिल हैं।
होर्मुज जलसंधि खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। जापान का यह कदम न केवल घरेलू बाजार को स्थिर करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट में एक मिसाल कायम करेगा।