
नई दिल्ली। गाजियाबाद के हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने संसद में पक्ष-विपक्ष के सांसदों को एकजुट कर दिया है। भवन से गिरने के बाद 13 वर्षों से कोमा में जी रहे राणा के माता-पिता की याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया, जिसकी चारों ओर तारीफ हो रही है।
जेएमएम सांसद महुआ मोइत्रा ने इसे प्रशंसनीय कदम बताया। उन्होंने कहा, ‘परिवार जब व्यक्ति के दर्द को बर्दाश्त न कर सके, न जी पाने और न मर पाने की स्थिति में यह प्रयास सराहनीय है।’
कांग्रेस की रजनी पाटील ने महाराष्ट्र की शानबाग मामले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी अवस्था में पैसिव यूथेनेशिया आवश्यक है। ‘वर्षों बिस्तर पर पड़े रहना सभी के लिए कष्टकारी है।’
भाजपा की किरण चौधरी ने मानवीय दृष्टि से फैसले का स्वागत किया। ‘परिवार का दुख कम होता है जब सुधार असंभव हो। विदेशों में कानूनी इच्छामृत्यु संभव है, भारत को भी सख्त कानून चाहिए ताकि दुरुपयोग न हो।’
पप्पू यादव ने सुझाव दिया कि सरकार को विदेशी इलाज की व्यवस्था करनी चाहिए थी। ‘आर्थिक तंगी परिवार को विचलित कर देती है। इच्छामृत्यु अंतिम विकल्प है।’ रामदास आठवले ने कहा कि कोर्ट ने उनकी इच्छा का सम्मान किया।
यह फैसला भारत में जीवन के अंत पर बहस को नई दिशा देगा, जहां गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार पर विचार तेज हो सकते हैं।