
नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के उग्र संकट के बीच सक्रिय कूटनीति की नई कड़ी जोड़ी। बुधवार को उन्होंने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट से फोन पर विस्तृत बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय संघर्ष पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह विचारों का आदान-प्रदान सराहनीय रहा और व्यक्तिगत स्तर पर इसे जारी रखने की इच्छा जताई। यह संवाद उस समय हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद तनाव चरम पर है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन-मिसाइलों से अमेरिकी अड्डों, राजधानियों और सहयोगी ठिकानों को निशाना बनाया।
मंगलवार को जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से भी लंबी बात की, जिसमें ताजा हालातों पर चर्चा केंद्र में रही। ‘ईरान के मंत्री अराघची से वर्तमान स्थिति पर गहन चर्चा। संपर्क में बने रहने पर सहमति,’ उन्होंने एक्स पर लिखा।
दक्षिण कोरिया के चो ह्यून से भी मंगलवार को द्विपक्षीय संबंधों, कोरियाई प्रायद्वीप और मध्य पूर्व के वैश्विक प्रभाव पर विचार हुए। सियोल के अनुसार, दोनों ने सुरक्षा समन्वय पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा, ‘कोरिया के चो ह्यून से अच्छी बातचीत। द्विपक्षीय मुद्दों के साथ पश्चिम एशिया और ऊर्जा प्रभाव पर चर्चा।’
जर्मनी के योहान वेडेफुल से पूर्व बात हुई। ये प्रयास भारत की संतुलित भूमिका दर्शाते हैं, जो ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण हैं। संकट के बीच भारत की ये कूटनीतिक पहल वैश्विक स्थिरता में योगदान दे रही हैं।