
मुंबई, 11 मार्च। बंगाली अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी ने अपने पिता को याद करते हुए इंस्टाग्राम पर एक मार्मिक पोस्ट साझा की है, जो छह साल बाद भी उनके दिल को छू गई। फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में अपनी संवेदनशील भूमिकाओं से मशहूर स्वास्तिका ने निजी जिंदगी के इस दर्द को बंगाली में व्यक्त किया।
उन्होंने लिखा कि दुनिया की हर घटना पर पिता के साथ रातभर बहस होती। उनकी ज़ोरदार हंसी हर बुराई भगा देती। ‘बाबा, अगर खुलकर हंसने की प्रतियोगिता होती तो आप और मां हमेशा जीतते। आज कोई वैसा हंसना ही भूल गया।’ यह शब्द आज की दुनिया की संकोची हंसी पर करारा प्रहार हैं।
नए प्रोजेक्ट्स पर उत्साह में भी उदासी घुली रहती। ‘काश आप देख पाते। ये काश इतने बढ़ गए कि कंचनजंगा से ऊंचे हो जाएंगे।’ घर में उनकी उपस्थिति का अहसास अब भी बना रहता—बाहर के कमरे की खाट पर, उनके स्पर्श में। ‘आपका होना ही मेरा सहारा, बरगद की छांव जैसा।’
उनका स्टील का बड़ा गिलास अब उनका है। पीते वक्त पिता के सुंदर हाथ नजर आते। ‘ऐसे हृदयस्पर्शी हाथ किसी और पुरुष के न देखे।’ वादा याद दिलाया, ‘अगली बार आप आना। छह साल बीते, बाकी भी निकल जाएंगे। बादलों के देश में मिलेंगे। प्यार करता हूं, बाबा—गले लगाकर कहूंगी।’
पहाड़ी शूटिंग के दौरान बादल घिरे तो लगा पिता आ रहे। ‘क्या आप गले लगा रहे हो? आसमान भी उदास है।’ यह पोस्ट प्रशंसकों के बीच भावनाओं की बाढ़ ला रही है।