
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अचानक मूड बदलना आम बात हो गई है, लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि यह बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। समय रहते पहचान और उपचार न हो तो यह जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं चरम पर हैं। बाइपोलर इसकी प्रमुख कड़ी है, जिसमें मैनिया और डिप्रेशन के चक्र चलते रहते हैं। मैनिया में व्यक्ति असीम ऊर्जा से भरा होता है, कम सोता है, तेजी से बोलता है और जोखिम भरे निर्णय लेता है।
डिप्रेशन में उदासी, थकान और रुचि की कमी घेर लेती है। नींद-भोजन बिगड़ जाते हैं, एकाग्रता जाती रहती है और कभी-कभी आत्महत्या के ख्याल भी आते हैं। इन लक्षणों को हल्के में न लें।
कारणों में आनुवंशिकता, मस्तिष्क रसायनों का असंतुलन और जीवन की घटनाएं शामिल हैं। 18-30 साल की उम्र में शुरूआत आम है। पुरुषों में मैनिया, महिलाओं में डिप्रेशन ज्यादा देखा जाता है, खासकर प्रसव के बाद।
उपचार में दवाएं, थेरेपी और जीवनशैली सुधार महत्वपूर्ण हैं। जागरूकता से कलंक मिटेगा और मरीज सामान्य जीवन जी सकेंगे।