
भारत की 1983 वर्ल्ड कप जीत की कहानी आज भी क्रिकेटप्रेमियों के दिलों में बसी है। इस गौरवशाली पल को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने वाली फिल्म ’83’ में चिराग पाटिल ने अपने पिता संदीप पाटिल का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया। पहली बार बल्ला थामकर उन्होंने स्क्रीन पर चमक दिखाई।
10 मार्च 1987 को मुंबई में जन्मे चिराग बचपन से क्रिकेट के वातावरण में पले-बढ़े। लेकिन उन्होंने खेल मैदान की बजाय पढ़ाई को चुना। बीएससी हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट की डिग्री हासिल कर वे होटल इंडस्ट्री की ओर बढ़े, मगर फिल्मों ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया।
अभिनय सफर की शुरुआत 2011 में मराठी फिल्म ‘राडा रॉक्स’ से हुई। फिर देव आनंद की ‘चार्जशीट’ से बॉलीवुड में एंट्री। मराठी सिनेमा में कई फिल्मों से उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और दर्शकों को प्रभावित किया।
फिल्म ’83’ ने उन्हें स्टार बना दिया। पिता के रोल के लिए क्रिकेट ट्रेनिंग ली, वीडियो देखे और पूरी जान लगा दी। ‘यह सपना था, चुनौती भी,’ उन्होंने कहा। फिल्म की सफलता ने उनके टैलेंट को प्रमाणित किया।
अभिनेता के साथ वे बिजनेसमैन भी हैं। आरसीएसपी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स चलाते हैं और कर्जत में ‘द फार्महाउस’ रिसॉर्ट का संचालन करते हैं। चिराग की कहानी प्रेरणा देती है कि विरासत को नया रूप दिया जा सकता है।