
टी20 विश्व कप 2026 में न्यूजीलैंड पर शानदार जीत के बाद भारतीय टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव, जय शाह और गौतम गंभीर का हनुमान मंदिर में ट्रॉफी लेकर जाना विवादों में घिर गया है। टीएमसी सांसद व पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने इसे देश की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ बताया।
आईएएनएस से बातचीत में आजाद ने कहा, ‘हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है। खिलाड़ी टीम और राष्ट्र के लिए खेलते हैं, किसी धर्म के लिए नहीं।’ उन्होंने 1983 विश्व कप की याद दिलाई जब टीम में सभी धर्मों के खिलाड़ी थे, फिर भी ट्रॉफी मंदिर नहीं ले जाई गई। संजू सैमसन और मोहम्मद शिराज की सराहना करते हुए बोले, ‘यह हिंदुस्तान की टीम है, सबकी जीत।’
ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर उन्होंने सवाल उठाया, ‘फिर भारत-पाकिस्तान में फर्क क्या? मैं खुद हिंदू हूं, लेकिन खेल में धर्म नहीं जोड़ता।’ सोशल मीडिया पर उन्होंने तीखा पोस्ट लिखा था कि टीम पर शर्मिंदगी महसूस हो रही है। ‘1983 में कपिल देव की कप्तानी में ट्रॉफी भारत लाए थे, न कि धार्मिक स्थल पर। मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारा क्यों नहीं?’
आजाद ने जोर दिया, ‘यह सभी भारतीयों की ट्रॉफी है, एक धर्म की नहीं। सिराज ने मस्जिद नहीं चुनी, संजू ने चर्च नहीं।’ यह विवाद खेल में धर्म की घुसपैठ पर बहस छेड़ रहा है, जहां आजाद की आवाज एकता की मिसाल पेश कर रही है।