
काशीपुर शहर में बसौड़ा पर्व का रंग चढ़ गया है। होली के एक सप्ताह बाद मनाए जाने वाले इस त्योहार पर प्राचीन शीतला माता मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। चैत्र द्वितीया से प्रारंभ विशेष पूजाओं का दौर आज भी जोरों पर है।
सुबह होते ही मंदिर के बाहर लंबी-लंबी लाइनों में भक्त खड़े दिखे। मां शीतला देवी के दर्शन के लिए उत्साहित लोग प्रसाद लेकर आए। मंदिर प्रबंधक पंडित संदीप मिश्रा ने बताया कि मां को रोगनाशक माना जाता है। इन्हें नगर कोट देवी, महाकाली जैसे कई नामों से पुकारा जाता है।
ऋतु परिवर्तन की बीमारियों से बचाव के लिए चैत्र द्वितीया से पूजन शुरू होता है। भक्त हल्दी तिलक, नारियल, कच्चा दूध, चना-दालें, गुड़, पुए आदि चढ़ाते हैं। धार्मिक विश्वास है कि बसौड़ा पूजन से घरों में रोग दूर होते हैं।
होली के अगले दिन से वैशाखी तक सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को पूजा का आयोजन रहता है। शीतला सप्तमी-अष्टमी पर विशेष महत्व है। पंडित मिश्रा बोले, ‘सुबह पांच बजे से दर्शन का सिलसिला लगा है।’ 10-11 मार्च को मुख्य बसौड़ा है, लेकिन आज सोमवार होने से भीड़ रही।
भीड़ प्रबंधन की पूरी व्यवस्था है, जिससे भक्तों को सहज दर्शन मिल रहे हैं। यह पर्व स्वास्थ्य, स्वच्छता व रोगमुक्ति का प्रतीक है।