
नई दिल्ली में राज्यसभा में सोमवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सरकार की शीर्ष चिंता बनी हुई है।
संघर्ष की स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के अभियान को तेज कर दिया गया है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में भारतीय समुदाय का विशाल आकार इसे भारत के लिए विशेष महत्वपूर्ण बनाता है।
सत्र की शुरुआत में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संघर्ष में भारतीयों की मौत का मुद्दा उठाया, जिससे हंगामा मच गया। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें रोकते हुए जयशंकर को बयान देने का मौका दिया।
नारेबाजी के बीच जयशंकर ने स्थिति स्पष्ट की कि अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुआ यह विवाद व्यापक तबाही और इस्लामी नेतृत्व के प्रमुख चेहरों की हत्या के साथ भयावह रूप ले चुका है। तनाव अब कई देशों में फैल चुका है।
28 फरवरी को भारत ने गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम, नागरिक सुरक्षा तथा तनाव न बढ़ाने की अपील की। सरकार का मानना है कि वार्ता और कूटनीति से ही अंदरूनी विवाद सुलझ सकते हैं तथा क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान आवश्यक है।
1 मार्च को प्रधानमंत्री की अगुवाई में कैबिनेट सुरक्षा समिति की बैठक हुई, जिसमें ईरान एयरस्ट्राइक और खाड़ी हमलों पर चर्चा हुई। भारतीय समुदाय की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता तथा आर्थिक प्रभाव पर विचार किया गया।
यात्रियों और छात्रों की परेशानियों पर भी ध्यान दिया गया तथा संबंधित विभागों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए। पीएम मोदी हर नवीनतम घटना पर नजर बनाए हुए हैं।
जयशंकर ने कहा कि युद्ध बढ़ रहा है, सुरक्षा ढांचा चरमरा गया है तथा सामान्य जीवन ठप हो चुका है। 3 मार्च को फिर से कूटनीति की अपील की गई। सदन जानमाल के नुकसान पर शोक प्रकट करने में एकजुट है।
भारत कूटनीतिक प्रयासों से नागरिकों की रक्षा और शांति बहाली के लिए प्रयासरत है।