
मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इसकी चपेट में सोमवार को भारतीय तेल विपणन कंपनियों के शेयर बुरी तरह गिरे, जिसमें 9 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल (आईओसीएल) के शेयर शुरुआती कारोबार में 7 से 9 प्रतिशत नीचे आए। इस माह अब तक इन सरकारी दिग्गजों में 14-15 प्रतिशत की कुल गिरावट हो चुकी है। जानकारों के अनुसार, तेल महंगा होने से इनकी उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जो मुनाफे को प्रभावित करती है।
एचपीसीएल में सबसे ज्यादा 8.7 प्रतिशत की गिरावट आई, उसके बाद बीपीसीएल 7.99 प्रतिशत और आईओसीएल 7.2 प्रतिशत। दोपहर 12:36 बजे तक एनएसई पर एचपीसीएल 379.20 रुपये (6.32% नीचे), बीपीसीएल 333.55 रुपये (5.50% नीचे) और आईओसीएल 160 रुपये (8.64% नीचे) पर था।
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, क्योंकि प्रमुख उत्पादक देशों ने उत्पादन घटाया और होर्मुज जलमार्ग अवरुद्ध हो गया। पिछले सप्ताह 28 प्रतिशत की तेजी के बाद यह 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी स्थिति है।
विशेषज्ञ चेताते हैं कि संघर्ष लंबा खिंचा तो कीमतें 143 डॉलर तक जा सकती हैं। ऊर्जा विशेषज्ञ डेनियल येर्गिन ने इसे ऐतिहासिक आपूर्ति संकट बताया। मिसाइल हमलों से एशिया-यूरोप व्यापार प्रभावित हो रहा है। भारत जैसे आयातक देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा। निवेशक मध्य-पूर्व की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।