
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को धरना स्थल से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में हो रहे बदलाव का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को फायदा पहुंचाना है।
ममता ने चुनौती भरा लहजा अपनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग का पूरा समर्थन मिलने के बावजूद भाजपा चुनाव नहीं जीत पाएगी। ‘बंगाल की जनता अपने हक छीनने वालों को मुंहतोड़ जवाब देगी,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि 2024 लोकसभा चुनाव में वोट डाल चुके मतदाताओं के नाम सूची से कैसे काटे जा सकते हैं। ‘जिन वोटरों ने प्रधानमंत्री चुना, उन्हें अचानक अयोग्य कैसे ठहराया जा रहा है? पहले वोट वैध था, अब नाम हटाना अन्याय है,’ ममता ने कहा।
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इसकी जांच की मांग की। साथ ही राज्यपाल सीवी आनंद बोस के 5 मार्च को इस्तीफे पर सवाल खड़े किए, क्योंकि उनके कार्यकाल में अभी तीन साल बाकी थे। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की भी जांच होनी चाहिए, उन्होंने जोड़ा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम स्थल बदलने के विवाद में ममता ने राज्य सरकार के प्रोटोकॉल पालन का बचाव किया। ‘कोई अव्यवस्था हुई तो जिम्मेदार निजी आयोजक और एयरपोर्ट अथॉरिटी हैं, न कि राज्य सरकार,’ उन्होंने स्पष्ट किया। भाजपा द्वारा इसे राजनीतिक रंग देने पर भी निशाना साधा।
चुनावी जंग तेज होने के बीच ममता का यह बयान तृणमूल कांग्रेस को मजबूत संदेश देता है।