
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तेज होता संघर्ष अब पाकिस्तान के बलूचिस्तान तक पहुंच गया है। मकरान और रक्शान क्षेत्रों में ग्वादर, केच, पंजगुर, चागई व वाशुक जैसे इलाकों में ईंधन व खाद्य पदार्थों की भारी किल्लत हो गई है। सीमावर्ती बाजारों में कीमतें 40 प्रतिशत तक उछल चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोग चिंता में डूबे हैं।
ये क्षेत्र ईरानी सामानों पर बुरी तरह निर्भर हैं, जो पाकिस्तान के अन्य भागों से आने वाली चीजों से सस्ते व सुगम उपलब्ध होते हैं। मकरान ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष इशfaq रोशन दाश्ती के अनुसार, यहां 80 प्रतिशत ईंधन व खाद्य सामग्री ईरान से आती है।
ईरान ने साल की शुरुआत में विरोध प्रदर्शनों के बाद खाद्य निर्यात पर 30 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगाया था। अब युद्ध के कारण सीमा पूरी तरह बंद है और आटा, तेल, दूध, दही, एलपीजी, पेट्रोल-डीजल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। दाश्ती बोले, ‘ट्रेड ठप हो चुका है।’
ग्वादर, जीवनी, पासनी व ओरमारा में खाद्य वस्तुओं के दाम 30-40 प्रतिशत बढ़े। एलपीजी 600 पाकिस्तानी रुपये किलो पहुंचा, डीजल-तेल 60-70 प्रतिशत महंगे। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट में यह सामने आया। ग्वादर का मछली उद्योग भी प्रभावित, जहां हजारों लोग जीविका चलाते हैं।
यह संकट अमेरिका-इजरायल के ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हमलों से भड़का, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए। ईरान ने ड्रोन-मिसाइल से जवाब दिया। बलूचिस्तान के लिए यह आपदा है, जहां सड़क संपर्क कमजोर होने से विकल्प नहीं। व्यापारी खुदा दाद ने कहा, ‘मशकेल में स्टॉक खत्म होने को है।’ राहत के प्रयास जरूरी हैं।