
नई दिल्ली, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2003 का एक पुराना भाषण सोशल मीडिया पर छा गया है। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में दिए गए इस संबोधन में उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल भारत ने ही महिलाओं को छोटा नहीं, बल्कि भगवान का सर्वोच्च स्वरूप माना है।
‘मोदी आर्काइव’ द्वारा एक्स पर साझा वीडियो में मोदी ने बताया कि अमेरिका जैसी पुरानी लोकतंत्र को महिलाओं को वोट का अधिकार देने में एक सदी से अधिक समय लगा, जबकि भारत ने 1947 में ही सभी को समान मताधिकार दिया। यह उन कानूनों से पहले की बात है जिन्होंने संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया।
मोदी ने सवाल उठाया कि नारी शक्ति को घर तक ही क्यों सीमित रखा जाए? इसे ग्राम सभा, जिला स्तर और हर निर्णय प्रक्रिया तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने भारत की सभ्यता पर जोर दिया जहां अंबा, दुर्गा, सरस्वती व लक्ष्मी के रूप में महिलाओं को पूजा जाता है – कोई अन्य परंपरा ऐसा नहीं करती।
रविवार को पीएम मोदी ने महिला दिवस पर कहा कि महिलाएं दृढ़ता से भारत की प्रगति का निर्माण कर रही हैं। उनकी योजनाएं महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित हैं, जो राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को मजबूत बनाएंगी। यह पुराना बयान आज भी प्रासंगिक है, जो भारत की प्राचीन नारी सम्मान की गाथा दोहराता है।