
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संजय लीला भंसाली की फिल्में महिलाओं की सशक्त छवि का शानदार उदाहरण पेश करती हैं। हिंदी सिनेमा में जहां कभी महिलाओं को हाशिए पर रखा जाता था, वहीं भंसाली ने उन्हें केंद्र में स्थापित किया।
उनकी मां द्वारा अकेले पाले जाने का असर उनकी फिल्मों में साफ झलकता है। छोटे मंचों पर नाचती मां की मेहनत देख भंसाली ने महिलाओं के लिए भव्य सेट और शानदार परिधान सुनिश्चित किए। हर संवाद और दृश्य में स्त्री शक्ति का एहसास होता है।
‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में मनीषा कोइराला की ऐनी परिवार के लिए सपनों का त्याग करती है, बेदखली के बाद भी अडिग रहती है। ‘हम दिल दे चुके सनम’ की नंदिनी ऐश्वर्या राय के रूप में जीवंत और विद्रोही है, प्रेम के लिए सब कुछ दांव पर लगाती है।
‘ब्लैक’ में रानी मुखर्जी का किरदार अंधी-बहरा होने के बावजूद संघर्ष का प्रतीक है। ‘बाजीराव मस्तानी’ में मस्तानी और काशीबाई दोनों तलवारबाज योद्धा के रूप में उभरती हैं। ‘पद्मावत’ की पद्मावती दीपिका के ग्रेस से खिलजी को मात देती है।
आलिया की गंगूबाई शक्ति और संहार की मूर्ति बनी, जबकि ‘हीरामंडी’ की तवायफें सत्ता की बाजीगरी करती नजर आती हैं। भंसाली की ये रचनाएं महिलाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाती हैं।