
वॉशिंगटन। ईरान के विपक्षी नेताओं ने देश के भविष्य के लिए एक विस्तृत संक्रमण योजना तैयार की है, जिसमें भारत को प्रमुख आर्थिक साझेदार के रूप में रखा गया है। इस 178 पेज के दस्तावेज में चाबहार बंदरगाह परियोजना को फिर से शुरू करने और कच्चे तेल के निर्यात को बहाल करने पर विशेष जोर दिया गया है।
ईरान प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट के इमरजेंसी फेज का यह ब्लूप्रिंट वर्तमान व्यवस्था के पतन के बाद पहले छह महीनों में अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को स्थिर करने की रूपरेखा पेश करता है। भारत को प्रतिबंधों के बाद व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित चाबहार पोर्ट को फारस की खाड़ी और हिंद महासागर को मध्य एशिया से जोड़ने वाले व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। भारत के लिए यह पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का रणनीतिक द्वार है।
दस्तावेज में भारत को प्रमुख ऊर्जा आयातक के रूप में पुनर्स्थापित करने की बात कही गई है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित हुई थी। ईरान खुद को क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है, जिसमें भारत अहम भूमिका निभाएगा।
चीन-रूस जैसे देशों से संबंध सुधारने के साथ-साथ पाकिस्तान समेत पड़ोसियों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का भी प्लान है। क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने टेक्नोक्रेट्स और प्रवासियों को जोड़कर यह रोडमैप तैयार किया है।
भारत ने चाबहार में 12 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है, लेकिन प्रतिबंधों ने प्रगति रोकी। यह योजना ईरान को वैश्विक व्यापार में वापस लाने का संकेत देती है।