
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बीच दुबई से भारतीय यात्रियों को सुरक्षित वापस लाया गया है। पुणे हवाई अड्डे पर उतरते ही यात्रियों ने भारत सरकार के त्वरित प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने दुबई की स्थानीय व्यवस्था और भारतीय दूतावास के सहयोग की भी सराहना की, जो संकटकाल में सहारा बने।
छात्रा निधि ने बताया, ‘शनिवार को संघर्ष शुरू होने पर भय व्याप्त था, लेकिन कॉलेज, दूतावास और केंद्र सरकार ने शानदार मदद की। सब व्यवस्थित रहा।’ घर लौटकर उन्हें सुकून मिला है और वे शीघ्र शांति की आशा कर रही हैं ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
निधि बोलीं, ‘सरकार ईमानदारी से काम कर रही है। विदेशों में भारतीयों को सर्वोत्तम समर्थन यही सरकार देती है। हम गर्व महसूस करते हैं।’
कार्ययात्रा पर गई प्रियंका ने कहा, ’15 दिनों की यात्रा में युद्धग्रस्त माहौल का अहसास ही नहीं हुआ। यूएई ने हर किसी की सुरक्षा सुनिश्चित की। दूर कहीं धमाके सुनाई दिए, पर घबराहट नामुमकिन।’
अर्जुन बंधू ने एयरपोर्ट हादसे का जिक्र किया, ‘मिसाइल अलर्ट पर हमें बंकर में ले जाया गया। बाद में पता चला, हमले नाकाम कर दिए गए।’
आनंद विनेर्कर ने स्पाइसजेट का धन्यवाद किया, जबकि छह साल से यूएई में कार्यरत गुल्फाम ने कहा, ‘शोर सुनाई दिया, लेकिन व्यवस्था चाक-चौबंद रही।’
ये कहानियां भारत की तैयारियों और द्विपक्षीय मित्रता को रेखांकित करती हैं। पुणे में परिवारों के स्वागत से संदेश स्पष्ट है- शांति ही समाधान है।