
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की अदालत ने एक पुराने और क्रूर हत्याकांड में न्याय की मिसाल कायम की है। अहियापुर थाना क्षेत्र के सिवराहां चतुर्भूज गांव में 1991 में हुई कुंवर राय की निर्मम हत्या के मामले में एडीजे-5 आलोक कुमार पांडेय ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया, जो न चुकाने पर दो साल की अतिरिक्त सजा होगी।
घटना 9 अगस्त 1991 की है, जब बैधनाथ राय लाइसेंसी बंदूक लेकर अन्य साथियों संग मोहन राय के खेत पर ट्रैक्टर से जुताई करने पहुंचे। विरोध पर मोहन की मां बसंती देवी को लाठियों से पीटा और पेड़ से बांध दिया। शोर सुनकर बसंती के भाई कुंवर राय दौड़े, लेकिन बैधनाथ ने उन पर तीन फायर कर दिए।
गोली लगने के बाद भी अपराधियों का क्रूरता हावी रही। उन्होंने कुंवर राय की दाहिनी बांह तोड़ दी और वे मौके पर दम तोड़ बैठे। मोहन राय के बयान पर 13 नामजद आरोपियों की एफआईआर दर्ज हुई। अभियोजन पक्ष के सुनील कुमार पांडेय ने गवाहों और साक्ष्यों से अदालत को राय दी।
पीड़ित परिवार ने इसे न्याय की बड़ी जीत बताया। 34 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली यह सजा गांव में खुशी की लहर ला गई। दोषी बैधनाथ राय, रामबलम राय, महंथ राय, रामचंद्र पासवान और सहदेव राय के चेहरे लटक गए। यह फैसला भूमि विवाद में हिंसा के खिलाफ चेतावनी है।