
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पाचन संबंधी परेशानियां आम हैं, लेकिन लगातार पेट फूलना को हल्के में न लें। यह केवल गैस नहीं, बल्कि ओवरऑल हेल्थ का खतरे का इशारा हो सकता है। विज्ञान और आयुर्वेद दोनों पाचन तंत्र को शरीर का मूल आधार मानते हैं। आंतों के बार-बार मिलने वाले संदेशों को नजरअंदाज न करें।
एसिडिटी और ब्लोटिंग में फर्क समझें। एसिडिटी से सीने में जलन या खट्टी डकार आती है, जबकि ब्लोटिंग में पेट में सूजन, भारीपन महसूस होता है। गैस जमा होने से ऐसा होता है, आयुर्वेद में इसे कमजोर अग्नि और वात दोष से जोड़ा जाता है। अधपका खाना गैस पैदा करता है।
ज्यादा तला-भुना खाने या देर रात भोजन से कभी-कभार फूलना स्वाभाविक है। लेकिन रोजाना दर्द, कब्ज-दस्त, जल्दी पेट भरना या बिना वजह वजन घटना चिंताजनक है। आईबीएस, थायरॉइड या हार्मोनल इम्बैलेंस इसके पीछे हो सकते हैं।
हाइपोथायरॉइड से आंतें सुस्त पड़ती हैं, महिलाओं में पीरियड्स या मेनोपॉज में हार्मोन बदलाव सूजन लाते हैं। तनाव आंतों के बैक्टीरिया बिगाड़ता है, आयुर्वेद में चिंता वात बढ़ाती है।
2-3 हफ्ते से ज्यादा ब्लोटिंग, भूख न लगना या नींद खराब हो तो डॉक्टर से मिलें। ब्लड टेस्ट से थायरॉइड-एनीमिया चेक, फिर मल टेस्ट या अल्ट्रासाउंड। जल्दी जांच से बड़ी मुसीबत टल सकती है।