
मुंबई में वित्तीय अपराधों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कड़ा प्रहार किया है। 2 मार्च को एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अर्चना कुटे को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार कर लिया। विशेष अदालत ने 3 मार्च को उन्हें 7 मार्च तक ईडी हिरासत में भेज दिया, ताकि गहन पूछताछ हो सके।
यह कार्रवाई ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (डीएमसीसीएसएल) से जुड़े विशाल घोटाले की जांच का हिस्सा है। महाराष्ट्र में मई-जुलाई 2024 के बीच दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच में सुरेश कुटे और सहयोगियों पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगा।
सोसायटी ने 12-14 प्रतिशत रिटर्न का लालच देकर जमा योजनाएं चलाईं, जिनमें लाखों लोगों ने पैसा लगाया। लेकिन बाद में न तो मूलधन लौटा, न ब्याज, जिससे आम आदमी को भारी नुकसान हुआ।
ईडी की छानबीन से पता चला कि 2,467 करोड़ रुपये कुटे परिवार की कंपनियों को बिना गारंटी के लोन के रूप में ट्रांसफर किए गए। इनका इस्तेमाल निजी सुख-सुविधाओं और बेमतलब कारोबारों में हुआ। सुरेश कुटे पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, उनके खिलाफ शिकायत दर्ज है और अदालत ने संज्ञान ले लिया।
एजेंसी ने 1,621.89 करोड़ की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच जारी है, जो कोऑपरेटिव क्षेत्र की कमियों को उजागर कर रही है। पीड़ित निवेशकों को न्याय की उम्मीद बंधी है।