
बांग्लादेश में हालिया आम चुनावों के बाद हिंसा की लहर ने देश को हिलाकर रख दिया है। मानवाधिकार संगठन ओधिकार की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 से 28 फरवरी के बीच 104 घटनाओं में 10 लोगों की जान गई और 476 घायल हुए। स्थानीय मीडिया ने इन आंकड़ों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है, जो लोकतंत्र पर बढ़ते संकट को उजागर करते हैं।
‘लोकतंत्र बहाली में सहायता: बांग्लादेश चुनावी हिंसा की निगरानी’ प्रोजेक्ट के तहत जारी इस रिपोर्ट को यूरोपियन पार्टनरशिप फॉर डेमोक्रेसी ने समर्थन दिया। रिपोर्ट बताती है कि 28 प्रतिशत घटनाएं (कुल 29) बीएनपी और उसके विभाजित गुटों के आपसी संघर्ष से जुड़ीं, जिसमें चार मौतें और 136 घायल हुए।
पीड़ितों में बीएनपी कार्यकर्ता, जमात-ए-इस्लामी समर्थक, अवामी लीग के लोग, बीएनपी से जुड़े निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थक और निर्दोष नागरिक शामिल। खुलना मंडल में सबसे ज्यादा तीन मौतें और 191 घायल; राजशाही व बरीशाल में दो-दो; ढाका में एक मौत व 90 घायल; चटगांव व मैमनसिंह में एक-एक।
50 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष निरीक्षण से 17 इलाकों में 32 घटनाएं दर्ज, जिनमें पांच मौतें व 41 घायल। खुलना-3 में सबसे अधिक चोटें। घटनाओं में मारपीट, धमकी, संपत्ति क्षति शामिल, जिसमें सिलहट के एक हिंदू मंदिर पर रात्रि हमला भी।
44 प्रतिशत मामलों में पुलिस जांच या भीड़ नियंत्रण हुआ, बाकी में सरकारी उदासीनता। ओधिकार ने निष्पक्ष जांच, कमजोर वर्गों की सुरक्षा, पूर्व चेतावनी प्रणाली और पार्टी विवाद प्रबंधन की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी हिंसा रुके।