
मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर तीखा प्रहार किया है।
सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में राहुल ने कहा, ‘दुनिया अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर चुकी है। भारत की तेल आपूर्ति जोखिम में है क्योंकि 40 प्रतिशत से ज्यादा आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। एलपीजी और एलएनजी की स्थिति और गंभीर है।’ उन्होंने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत के डूबने का जिक्र करते हुए कहा कि संघर्ष हमारे पड़ोस तक पहुंच चुका है, फिर भी पीएम मौन हैं।
राहुल ने जोर देकर कहा कि ऐसे समय में स्थिर नेतृत्व जरूरी है, लेकिन हमारे पास समझौतावादी पीएम हैं जिन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता त्याग दी। गुरुवार को कच्चे तेल के दाम 2 प्रतिशत से ज्यादा उछल गए क्योंकि ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया और एक कंटेनर जहाज पर हमला हुआ।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास 25 दिनों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक है। देश 85 प्रतिशत तेल आयात करता है, जिसमें आधा मिडिल ईस्ट से होर्मुज मार्ग से आता है। ईरान युद्ध से आपूर्ति बाधित हुई है।
राहुल का यह हमला विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगता है, जो जनता की चिंताओं को उभार रहा है। ईंधन महंगाई के डर से बाजार हिलोरें ले रहे हैं, और सरकार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि संकट कितना गहराएगा। भारत को अब मजबूत कूटनीति और वैकल्पिक रास्तों की जरूरत है।