
भारत की प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) ने गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराने में नई मिसाल कायम की है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चल रही यह योजनाएं अब ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। सामाजिक समावेश, लैंगिक समानता और आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित पीएमएवाई ने आवास को महज आश्रय से कहीं आगे बढ़ाकर सम्मान और अधिकार का प्रतीक बना दिया है।
ग्रामीण इलाकों में पीएमएवाई-ग्रामीण के तहत बने लाखों घरों में से करीब 70 प्रतिशत महिलाओं के नाम पर दर्ज हैं। सरकारी निर्देशों के अनुसार, घर का मालिकाना हक महिलाओं को अकेले या संयुक्त रूप से दिया जाता है। इससे परिवार में उनकी स्थिति मजबूत हुई है और संपत्ति के रूप में लोन या रोजगार के अवसर खुले हैं।
ये घर स्वच्छता, जल, बिजली, एलपीजी और सौर ऊर्जा जैसी योजनाओं से जुड़े हैं, जो महिलाओं के लिए स्वस्थ और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करते हैं। शहरी क्षेत्रों में पीएमएवाई-अर्बन और 2.0 झुग्गीवासियों व निम्न आय वालों के लिए किफायती आवास मुहैया करा रहे हैं, जहां ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के लिए महिला मालिकाना अनिवार्य है।
क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) ने वित्तीय मदद को आसान बनाया है। होम लोन पर ब्याज छूट के साथ महिलाओं को वैध मालिक बनाया जा रहा है, जो परिवारों और बैंकों दोनों को लाभ पहुंचा रहा है।
पीएमएवाई साबित करती है कि आवास नीति से लैंगिक न्याय और गरीबी उन्मूलन संभव है, जो ग्लोबल साउथ के लिए एक व्यावहारिक रास्ता दिखाती है।